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काम

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काम की तलाश में। निकले है इस आश में  गाँव, खलियानों को छोड़कर , सारे रिश्ते तोड़कर। अपनी यात्रा मोड़कर, कमाने की जुगत जोड़कर।। रोड़वेज की बसों में धक्का खाते हुए। लोकल ट्रेन में भीड़ संग गाते हुए।। काम की तलाश में।  विश्वास को मुट्ठी में दबाए हुए, उत्साह को सीने से लगाए हुए। चल पड़े किसी का बोझ उठाए हुए, कर्तव्य की भुख जगाए हुए।। जिम्मेदारियों का झोला उठाए हुए  उम्मीदों को जगाए हुए मै हक से काम मांगता हूं। मजबूरियों का पहाड़ खड़ा रहता सामने रात थक हार निकला फिर सुबह कमाने धक्के लगते हर रोज किसी बहाने। कच्ची नींद को आंखों में लिए अपने मै हक से काम मांगता हूं। ✍🏻 राजेश चोयल

आबरू

लुटती बहन बेटियो की आबरू को, चार दीवारी की कैद से तोल रहे हो। बढ़ रहे है दरिदंगी के दानव, कौन से रामराज्य की जय बोल रहे हो।। कब तक दरिंदो को पुचकरोगे, भूले भटके कहकर। कब तक बचाओगे, कानून की दलीलों को देकर।। कोई ऐसी वैसी गलती नही, जो कानून का गुनहगार है। कोई चौराहे ढूंढ़ लो तो, फाँसी का फंदा तैयार है।। राजेश चोयल  https://www.instagram.com/choyal_rajesh/

बर्बाद

कभी-कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  हा जमाने का ताने,हासिल न करने का मलाल बोझ बनकर रहेगा।  और टूटते सपने ,किए वादे ,क्या थे तुम्हारे इरादे जब कोई पूछेगा।।  तुम तो हारे से, डरे से चुप-चाप खड़े रहोगे।  कोई परिणाम पूछे तो उनसे क्या कहोगे।। दिखावटी बोलकर सब आगे बड़ जाएंगे।  पगलो की गिनती में तुम गिने जाओगे ।।  कभी कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  ✍राजेश चोयल

अजनबी शायर

 कुछ दिन और पलट लो पन्ने किताबो के ! अधूरे है अभी बुनने घर ख्वाबो के !! ✍🏻राजेश चोयल