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सरकार

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जहा पढ़े-लिखे नोजवान काम की भीख माँग रहे, वहा कैसे रोजगार की बात करते हो। जहा किसान कर्ज में डूब रहे, वहा कैसे कृषि-प्रधान देश की बात करते हो।। जहा सीमा पर जवान गोलियों से छल रहे, वहा कैसे जिम्मेदारी की बात करते हो। जहा आम लोग भ्रष्टाचार से तल रहे, वहा कैसे ईमानदारी की बात करते हो।। जहा रोज पलायन हो रहे, वहा कैसे घरबार की बात करते हो। जहा मजदूर खाली हाथ लौट रहे, वहा कैसे राम दरबार की बात करते हो।। जहा बहन-बेटीयो को दरिंदे नोच रहे, वहा कैसे चौकीदार की बात करते हो। जहा लोकतंत्र का नित्य दम घोट रहे, वहा कैसे सरकार की बात करते हो।। जहा दंगे-फसादों में घर जल रहे, वहा कैसे सरकारी तंत्र की बात करते हो। जहा मतदाता को रोज लूट रहे, वहा कैसे विकास के मंत्र की बात करते हो।। ✍️ राजेश चोयल " खाली कागज में रंग भर दो हजार। बोलियों से खरीद लो सारे बाजार।। वक्त हैं मौन रहने का बोलना बेकार। हम तो मतदाता आप ही है हमारे सरकार।।" "अंधे उल्लू दिन रात नही दिख पाते। लोग सही गलत नही समझ पाते।। भाषण और नारो में अपना हिस्सा ढूंढते। नकाब पहने भीड़ में खुद को ढूंढते...