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अंतरमन

अंतरमन में युद्ध चलते है ! स्वयं ही जल में तपते है !! शब्दो की सीमा से बंधे! किंचित लक्ष्य से सधे !! प्रश्नों की अविरल नदी ! उत्तर से भयभीत यदि !! अपेक्षाओं से खीची लकीरे ! उपेक्षाओ से बंधी जंजीरे !! मुग्ध आत्मचिंतन में ! अटकी गाठ बंधन में !! कसोटी पर दे कर परीक्षा ! संतो से प्राप्त लेकर दीक्षा !! तुम हो आत्म संदेह से लक्षित ! तुम हो आत्म विश्वास से रक्षित !! अंतरमन में विचार पलते है ! स्वयं ही स्वयं में खपते है !! ✍राजेश चोयल

अजनबी शायर

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१) जीने एक वजह और जुड़ गयी।      जब आप से मुलाकात हो गयी।।❣😘 २) बेवजह जिद जो तुम करती हो, वो भी किया माफ है।      संभाल के रखो रिश्ता, तुम्हे जो दिल दिया साफ है।। ३)  ख्वाब टूटे से लगते है, तेरे बिना यह अहसास अधूरे         से लगते है।     लौट आ स्याही में प्यार भरते है, यह अल्फाज अधूरे        से लगते है। ४)   जब तक खामोशी में पिघले इश्क।       तब तक रुआंसी में निकले अश्क।। ५)  किताबो के इर्द-गिर्द दुनिया, बस किताबो की बाते।      नयी सुबह की आश में, काट दी कितनी राते।। ✍🏻   राजेश चोयल