माँ

बंदिशे क़ायनात की इब आज़ाद हो गयी, 
बाहें माँ की मानो इक फरियाद हो गयी,
विचलित मन की इस जर्जर ईमारत में,
आँचल माँ का मजबूत बुनियाद हो गयी।

माँ की तुलना नही अब सहज बात हैं,
ये बात सच्ची ना मानो महज़ बात हैं,
राम हो, श्याम हो या हो परवरदिगार,
उच्च देवों से माँ हैं ये सहज़ बात हैं।

~हेमेंद्र वैष्णव

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