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बर्बाद

कभी-कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  हा जमाने का ताने,हासिल न करने का मलाल बोझ बनकर रहेगा।  और टूटते सपने ,किए वादे ,क्या थे तुम्हारे इरादे जब कोई पूछेगा।।  तुम तो हारे से, डरे से चुप-चाप खड़े रहोगे।  कोई परिणाम पूछे तो उनसे क्या कहोगे।। दिखावटी बोलकर सब आगे बड़ जाएंगे।  पगलो की गिनती में तुम गिने जाओगे ।।  कभी कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  ✍राजेश चोयल

दास्तां ए इंजीनियरिंग

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 इंजीनियर की जिंदगी😌 हमें कहा गया कि 10वी पास कर लो और फिर मजे ही मजे।  हम दसवी में 88 प्रतिशत नम्बर ले आये। 90 नहीं ला सके उसका दुख था।  जिदंगी बर्बाद हो गिया वाला सीन था।  खैर  फिर ग्यारवीं में आये। हमसे कहा गया कि 12वीं में 90 परसेंट ला दो फिर मजे ही मजे। हम फिर 87 प्रतिशत ही ला सके। अब लगा जिदंगी बर्बाद हो गया।  फिर किसी ने कहा बिना IIT, NIT के क्या बनोगे इंजीनियर। हमसे कहा गया jee क्लियर करलो फिर मजे ही मजे।  हम फिर लग गए। jee नहीं क्लियर हुआ पर aieee हो गया।  NIT मिल गया। IIT नहीं मिला इसका दुःख था। इस बार लगा जिनगी अब पूरा बर्बाद हो गया।  अब 4 साल बीत गए। प्लेसमेंट हो गया। फिर हमसे किसी ने कहा कि private की नौकरी में क्या रखा है। सरकारी नौकरी लो GATE निकालो फिर मजे ही मजे। हम फिर लग गए। एक साल दो साल। पर गेट तोड़ न पाये। अर्ध सरकारी नौकरी लगी BHEL में।  हम तो बस सच बतायें तो इंजीनियर बनना चाहते थे और नयी चीज़ें बनाकर देश के लोगों की मदद करना चाहते थे। ये ज़िन्दगी हमें क्या क्या बनाती गयी और पता नहीं क्या क्या बनायेगी। पर अब इतने बार...

बेरोजगारी

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बढ़ गयी माथे उधारी, जो सब मांगने लगे। बढ़ गयी बेरोजगारी, जो सब बताने लगे ।। पिताजी जो हमारे ATM है, उनके पिन (पासवर्ड) बदल गए। जीजाजी जो हमारे लाला है, उधार देने से मना कर गए।। सब कहते "भाई" छोटा-मोटा काम ही कर लो। खाली बैठे हो,सरकारी परीक्षाओं के फार्म भर लो।। रात देरी से सोता, सुबह देर तक उठता। क्या बताए भिया, अब पड़ोसी भी पूछने लगता।। चौकीदार कहता मकान मालिक ने याद किया है। बाकि है या बिजली बिल भर दिया है।। अखबारों में पढ़ खबरे, सेव परमल फांकता । अकेला रहता हूँ, तो खिड़की से  झाँकता ।। फ़िक्र से भरी दुनिया भाग रही , "न जाने कहा जाना है" मैं तो निठल्ला हूँ जी, भगवान ही जाने "कहा मेरा ठिकाना है"       ✍🏼राजेश चोयल

अजनबी शायर

 कुछ दिन और पलट लो पन्ने किताबो के ! अधूरे है अभी बुनने घर ख्वाबो के !! ✍🏻राजेश चोयल

राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस (17 सितम्बर)

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 उठो युवाओं ललकार दो,  कहो सरकार से रोजगार दो कहा जाता है युवा देश के भविष्य है क्यूंकि देश के भविष्य की जिम्मेदारी उन्हीं है के कंधो पर होती है, लेकिन जब युवाओं के ही भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा तो उस देश का भविष्य क्या होगा?  देश आज बहुत सारी समस्याओं से गुजर रहा है लेकिन फ़िलहाल बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है और उपर से  कोरोना जैसी महामारी, हालांकि इसका सक्षम परिवारों पर कोई असर नहीं देखने को मिल रहा, जिनको बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे दिखाई ही नहीं देते जो सिर्फ धर्म जाति की राजनीति तक सीमित रह गए, फ़र्क तो उस इंसान या परिवार को पड़ रहा है जो दैनिक मज़दूरी करके अपना घर चलाते है अपना परिवार पाल रहे है।  और इसी बात से जोड़कर आज के मुद्दे पर कहना चाहूंगा मेरे वो दोस्त जो इन हालातो से गुजर रहे है जिन्हे उनके माता - पिता ने कहीं मजदूरी करके तो कहीं कर्ज करके  पढ़ाया ताकि कल को उनका बच्चा पढ़कर लिखकर अच्छी नौकरी करेगा अच्छी इज्जत कमाएगा घर की दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी, और वो बच्चा इन हालातो में पढ़ भी रहा, लेकिन  सवाल कब तक? अर्जुन को...

अभियंता दिवस

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अभियंता दिवस की शुभकामनाए। हम जोड़ते है कभी बसाते , नये घरानों को । हम बनाते है कभी देते , आवाज  नए सपनो को ।। सोच नही थकती है, अभी दिखाते इस जमाने को। पाँव नही डगमगाते राहो पर, तभी रोजाना बदलते पैमानों को।। रुकता नही समय का चक्र, वहा रोक देते बड़े तुफानो को । जहा उड़ नही पाता पक्षी, वहा पंख देते बेगानो को।। सत्यता की बुनियाद पर, नित नव इमारते खड़ी करते है। धरती आसमान कर एक , राहे जो बड़ी करते है।। देखो इतिहास हम ही नल और नील दोनों भाई,  जिसने राम सेतु बनाया। हम वही तो है ब्रह्म , जिसने सारा संसार बनाया।। आदि अनादि काल से, सृजन करते विश्वकर्मा है। हम ही आज अभियंता एम. विश्वेश्वरैया, सतीश धवन , और डॉ.कलाम है।।         ✍🏻 राजेश चोयल