संदेश

आबरू

लुटती बहन बेटियो की आबरू को, चार दीवारी की कैद से तोल रहे हो। बढ़ रहे है दरिदंगी के दानव, कौन से रामराज्य की जय बोल रहे हो।। कब तक दरिंदो को पुचकरोगे, भूले भटके कहकर। कब तक बचाओगे, कानून की दलीलों को देकर।। कोई ऐसी वैसी गलती नही, जो कानून का गुनहगार है। कोई चौराहे ढूंढ़ लो तो, फाँसी का फंदा तैयार है।। राजेश चोयल  https://www.instagram.com/choyal_rajesh/

बर्बाद

कभी-कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  हा जमाने का ताने,हासिल न करने का मलाल बोझ बनकर रहेगा।  और टूटते सपने ,किए वादे ,क्या थे तुम्हारे इरादे जब कोई पूछेगा।।  तुम तो हारे से, डरे से चुप-चाप खड़े रहोगे।  कोई परिणाम पूछे तो उनसे क्या कहोगे।। दिखावटी बोलकर सब आगे बड़ जाएंगे।  पगलो की गिनती में तुम गिने जाओगे ।।  कभी कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  ✍राजेश चोयल

वीर उधम सिंह

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भारतीय चरम सीमा का परचम ही इतना भारी है, बलिदानों की गाथा यंहा की अदभुत न्यारी है,,। कुछ गद्दारों को ये वीरता रास नही आई, अपनो को मिटाने की चेष्टाएँ मन मे भाई,,। हँसते, गाते बच्चो की भावनाओ को मिटाया है, वीरो के भेदों को अंग्रेजों को बतलाया है,,। छल कपट से जलियावाला बाग को समशान में बदल दिया, बुजुर्ग, नवजवान,हँसते बच्चो को निहत्ता देख हमला किया,,। The Engineer वो डायर भी डायन बनने में हिचकिचाया नही, उसकी उद्दण्डता को देख उधम सिंह ने संकल्प लिया,,। प्रतिशोध था मन मे निह्ते बच्चो की हत्या का बदला लेना,,। इक्कीस सालों में डायर को मौत के घाट उतार दिया,,। वीरता का बखान किया , सपने को साकार किया , इस धरती धन्यधरा पर जन्म लेकर उधम ने अपने जीवन का उद्धार किया।। ✍️कन्हैया पड़ियार(kspr)रिंगनोद की कलम से।

सरकार

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जहा पढ़े-लिखे नोजवान काम की भीख माँग रहे, वहा कैसे रोजगार की बात करते हो। जहा किसान कर्ज में डूब रहे, वहा कैसे कृषि-प्रधान देश की बात करते हो।। जहा सीमा पर जवान गोलियों से छल रहे, वहा कैसे जिम्मेदारी की बात करते हो। जहा आम लोग भ्रष्टाचार से तल रहे, वहा कैसे ईमानदारी की बात करते हो।। जहा रोज पलायन हो रहे, वहा कैसे घरबार की बात करते हो। जहा मजदूर खाली हाथ लौट रहे, वहा कैसे राम दरबार की बात करते हो।। जहा बहन-बेटीयो को दरिंदे नोच रहे, वहा कैसे चौकीदार की बात करते हो। जहा लोकतंत्र का नित्य दम घोट रहे, वहा कैसे सरकार की बात करते हो।। जहा दंगे-फसादों में घर जल रहे, वहा कैसे सरकारी तंत्र की बात करते हो। जहा मतदाता को रोज लूट रहे, वहा कैसे विकास के मंत्र की बात करते हो।। ✍️ राजेश चोयल " खाली कागज में रंग भर दो हजार। बोलियों से खरीद लो सारे बाजार।। वक्त हैं मौन रहने का बोलना बेकार। हम तो मतदाता आप ही है हमारे सरकार।।" "अंधे उल्लू दिन रात नही दिख पाते। लोग सही गलत नही समझ पाते।। भाषण और नारो में अपना हिस्सा ढूंढते। नकाब पहने भीड़ में खुद को ढूंढते...

मैं हार गया हूँ!

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मैं हार गया हूँ ! शायद तुमने खुद को खो दिया है। तभी तो निराशा से बोल दिया है।। कि मैं हार गया हूँ ! बताओ तुम किसके जंग में लड़े थे। बताओ तुम किसके संग भिड़े थे।। बताओ तुम किसे हराने आये थे। बताओ तुम किसे दिखाने आये थे।। शायद तुमने संदेह का बीज बो दिया है। तभी तो निराशा से बोल दिया है।। कि मैं हार गया हूँ ! यदि तुम्हे अपनी हार का दुख है, तो क्यों रोना है। यदि तुम्हे मंजिल की भुख है, तो स्वयं को हराना है।। जब माथे से निकली पशीने की बूंदे, तलवों पर आ जाए। अभी तो बस तपे हो, किसी रोज लहू भी जल जाए।। न तुम्हारी होड़ किसी से है। न तुम्हारी दौड़ किसी से है।। स्वयं शत्रु हो, तुम स्वयं के लक्ष्य की और। लड़ भीड़ों उपेक्षाओं की दीवारों से, जो है उस छोर।। शायद तुम स्वयं से हार गए हो। तभी तो निराशा से बोल गए हो।। कि मैं हार गया हूँ ! " अधूरी है मंजिले , आधे-अधूरे है ख्वाब। भरी है मुश्किलें राहों में, अभी डरे न जनाब।।"                                              ✍️राजेश ...

कृषि बिल 2020

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केंद्र सरकार की ओर से कृषि सुधार बिल कहे जा रहे तीन में से दो विधेयक को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गए. अब इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अंतिम मुहर लगनी बाकी है जिसके बाद यह क़ानून बन जाएगा. दो बिल जो संसद से पास हो चुके हैं उनमें से एक कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020, और दूसरा कृषक (सशक्‍तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर क़रार विधेयक, 2020 है. किसानों का विरोध क्यों ? किसानों के देश की अपनी चिंताएँ.... अमेरिका के एक किसान ने ट्वीट किया कि उसने 2018 में मक्का जिस कीमत पर बेचा, मक्के की उससे ज्यादा कीमत उसके पिता को 1972 में मिली थी। यह एक ऐसे देश की दशा है, जहां छह-सात दशक से खुला बाजार है। अभी हाल ही में अमेरिकी कृषि विभाग के एक अर्थशास्त्री ने कहा है कि अमेरिकी किसानों की आय तेज गिरावट की ओर है। इससे पता चलता है कि जो बाजार सुधार अमेरिका ने कृषि क्षेत्र में सात दशक पहले किया था, वह नाकाम साबित हो चुका है। इस साल अमेरिका के किसानों पर 425 अरब डॉलर का कर्ज हो गया है। वहां ग्रामीण इलाकों में आत्महत्या की दर शहरों से 45 प्रत...

दास्तां ए इंजीनियरिंग

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 इंजीनियर की जिंदगी😌 हमें कहा गया कि 10वी पास कर लो और फिर मजे ही मजे।  हम दसवी में 88 प्रतिशत नम्बर ले आये। 90 नहीं ला सके उसका दुख था।  जिदंगी बर्बाद हो गिया वाला सीन था।  खैर  फिर ग्यारवीं में आये। हमसे कहा गया कि 12वीं में 90 परसेंट ला दो फिर मजे ही मजे। हम फिर 87 प्रतिशत ही ला सके। अब लगा जिदंगी बर्बाद हो गया।  फिर किसी ने कहा बिना IIT, NIT के क्या बनोगे इंजीनियर। हमसे कहा गया jee क्लियर करलो फिर मजे ही मजे।  हम फिर लग गए। jee नहीं क्लियर हुआ पर aieee हो गया।  NIT मिल गया। IIT नहीं मिला इसका दुःख था। इस बार लगा जिनगी अब पूरा बर्बाद हो गया।  अब 4 साल बीत गए। प्लेसमेंट हो गया। फिर हमसे किसी ने कहा कि private की नौकरी में क्या रखा है। सरकारी नौकरी लो GATE निकालो फिर मजे ही मजे। हम फिर लग गए। एक साल दो साल। पर गेट तोड़ न पाये। अर्ध सरकारी नौकरी लगी BHEL में।  हम तो बस सच बतायें तो इंजीनियर बनना चाहते थे और नयी चीज़ें बनाकर देश के लोगों की मदद करना चाहते थे। ये ज़िन्दगी हमें क्या क्या बनाती गयी और पता नहीं क्या क्या बनायेगी। पर अब इतने बार...