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सूर्य सा चमक लिए, सारे जग को नयी भोर दूंगा।
बादल सा खनक लिए , सारे जग को घनघोर दूंगा।।
स्वयं जलता रहू कर्म की ज्वाला से , जो अंधेरो से लड़ना है।
स्वयं भरता रहू अभाग्य की हाला से, जो थपेड़ों से गिरना है।।
✍🏻राजेश चोयल
अंतरमन में युद्ध चलते है ! स्वयं ही जल में तपते है !! शब्दो की सीमा से बंधे! किंचित लक्ष्य से सधे !! प्रश्नों की अविरल नदी ! उत्तर से भयभीत यदि !! अपेक्षाओं से खीची लकीरे ! उपेक्षाओ से बंधी जंजीरे !! मुग्ध आत्मचिंतन में ! अटकी गाठ बंधन में !! कसोटी पर दे कर परीक्षा ! संतो से प्राप्त लेकर दीक्षा !! तुम हो आत्म संदेह से लक्षित ! तुम हो आत्म विश्वास से रक्षित !! अंतरमन में विचार पलते है ! स्वयं ही स्वयं में खपते है !! ✍राजेश चोयल
मिट्टी का घर टूट गया। बाढ़ो से, जाड़ो से, ऊँची दहाड़ो से, मिट्टी का घर टूट गया। लगती पग -पग निराशा वाली दीमक। चिंताओं से सड़ता बुनियादी चट्टान।। आकांक्षा रूपी बोझ तले दबा घर सारा। अंतरमन दुःख से सिकुड़कर गिरता गारा ।। मिट्टी का घर टूट गया। गिरते हारकर आँसू धसती घर की दिवारे। बाहर झांको दुनिया तो टूटते दरवाजे खिड़किया।। मिट्टी का घर टूट गया। हार गए तुम अब, आवाजो से गूंजता घर। स्वयं विरूद्ध उठ रही आँधिया कंपकपाता घर ।। चुप्पी साधे मन, दीवारों की दरार बढ़ाती है। गिरा आत्मविश्वास का टुकड़ा, हवा मिट्टी उड़ाती है।। देखो मिट्टी का घर टूट गया। पर अब फिर से घर बनेगा । तो जमाना इसे सृजन कहेगा ।। आत्मविश्वास रूपी चट्टानो की बुनियाद होगी। आशाओं से भरी चिनाई होगी ।। बहता पानी चंचल सा मन होगा। उत्साह उमंग से गुथा गारा होगा।। देखो मिट्टी का घर बन गया।
❤❤ग़ज़ल*** किसी की याद ना आये, कोई ऐसी दुआ दे दो..! मुझको कर दे जो बरबाद ऐसी बद़दुआ दे दो..!! गया महबूब है मेरा अभी, मुझसे ख़फा हो कर..! धड़कना बंद कर दें दिल,मुझे ऐसी सज़ा दे दो..!! मेरी न बंद हों आँखें न, मुझको नींद अब आये..! किसी का ख़्वाब न देखूँ,कोई ऐसी दवा दे दो..!! मोहब्बत को हमेशा ही, इबादत हम समझते हैं..! ख़ता कोई हो नहीं जाये,खुदा ऐसी वफ़ा दे दो..!! अगर हमदर्द कोई ऐसा, तुम्हारे जैसा मिल जाये..! करे "वीरान" को आबाद जो,उसका पता दे दो..!! ✍🏻 आरती सुनील कदम
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