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काम

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काम की तलाश में। निकले है इस आश में  गाँव, खलियानों को छोड़कर , सारे रिश्ते तोड़कर। अपनी यात्रा मोड़कर, कमाने की जुगत जोड़कर।। रोड़वेज की बसों में धक्का खाते हुए। लोकल ट्रेन में भीड़ संग गाते हुए।। काम की तलाश में।  विश्वास को मुट्ठी में दबाए हुए, उत्साह को सीने से लगाए हुए। चल पड़े किसी का बोझ उठाए हुए, कर्तव्य की भुख जगाए हुए।। जिम्मेदारियों का झोला उठाए हुए  उम्मीदों को जगाए हुए मै हक से काम मांगता हूं। मजबूरियों का पहाड़ खड़ा रहता सामने रात थक हार निकला फिर सुबह कमाने धक्के लगते हर रोज किसी बहाने। कच्ची नींद को आंखों में लिए अपने मै हक से काम मांगता हूं। ✍🏻 राजेश चोयल

अंतरमन

अंतरमन में युद्ध चलते है ! स्वयं ही जल में तपते है !! शब्दो की सीमा से बंधे! किंचित लक्ष्य से सधे !! प्रश्नों की अविरल नदी ! उत्तर से भयभीत यदि !! अपेक्षाओं से खीची लकीरे ! उपेक्षाओ से बंधी जंजीरे !! मुग्ध आत्मचिंतन में ! अटकी गाठ बंधन में !! कसोटी पर दे कर परीक्षा ! संतो से प्राप्त लेकर दीक्षा !! तुम हो आत्म संदेह से लक्षित ! तुम हो आत्म विश्वास से रक्षित !! अंतरमन में विचार पलते है ! स्वयं ही स्वयं में खपते है !! ✍राजेश चोयल

बर्बाद

कभी-कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  हा जमाने का ताने,हासिल न करने का मलाल बोझ बनकर रहेगा।  और टूटते सपने ,किए वादे ,क्या थे तुम्हारे इरादे जब कोई पूछेगा।।  तुम तो हारे से, डरे से चुप-चाप खड़े रहोगे।  कोई परिणाम पूछे तो उनसे क्या कहोगे।। दिखावटी बोलकर सब आगे बड़ जाएंगे।  पगलो की गिनती में तुम गिने जाओगे ।।  कभी कभी किसी को छोड़ देना ही अच्छा रहता है।  क्युकी खुद से खुद को बर्बाद कर लेना कोई जीने का तरीका नही है।।  ✍राजेश चोयल

दास्तां ए इंजीनियरिंग

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 इंजीनियर की जिंदगी😌 हमें कहा गया कि 10वी पास कर लो और फिर मजे ही मजे।  हम दसवी में 88 प्रतिशत नम्बर ले आये। 90 नहीं ला सके उसका दुख था।  जिदंगी बर्बाद हो गिया वाला सीन था।  खैर  फिर ग्यारवीं में आये। हमसे कहा गया कि 12वीं में 90 परसेंट ला दो फिर मजे ही मजे। हम फिर 87 प्रतिशत ही ला सके। अब लगा जिदंगी बर्बाद हो गया।  फिर किसी ने कहा बिना IIT, NIT के क्या बनोगे इंजीनियर। हमसे कहा गया jee क्लियर करलो फिर मजे ही मजे।  हम फिर लग गए। jee नहीं क्लियर हुआ पर aieee हो गया।  NIT मिल गया। IIT नहीं मिला इसका दुःख था। इस बार लगा जिनगी अब पूरा बर्बाद हो गया।  अब 4 साल बीत गए। प्लेसमेंट हो गया। फिर हमसे किसी ने कहा कि private की नौकरी में क्या रखा है। सरकारी नौकरी लो GATE निकालो फिर मजे ही मजे। हम फिर लग गए। एक साल दो साल। पर गेट तोड़ न पाये। अर्ध सरकारी नौकरी लगी BHEL में।  हम तो बस सच बतायें तो इंजीनियर बनना चाहते थे और नयी चीज़ें बनाकर देश के लोगों की मदद करना चाहते थे। ये ज़िन्दगी हमें क्या क्या बनाती गयी और पता नहीं क्या क्या बनायेगी। पर अब इतने बार...

अजनबी शायर

 कुछ दिन और पलट लो पन्ने किताबो के ! अधूरे है अभी बुनने घर ख्वाबो के !! ✍🏻राजेश चोयल

राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस (17 सितम्बर)

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 उठो युवाओं ललकार दो,  कहो सरकार से रोजगार दो कहा जाता है युवा देश के भविष्य है क्यूंकि देश के भविष्य की जिम्मेदारी उन्हीं है के कंधो पर होती है, लेकिन जब युवाओं के ही भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा तो उस देश का भविष्य क्या होगा?  देश आज बहुत सारी समस्याओं से गुजर रहा है लेकिन फ़िलहाल बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है और उपर से  कोरोना जैसी महामारी, हालांकि इसका सक्षम परिवारों पर कोई असर नहीं देखने को मिल रहा, जिनको बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे दिखाई ही नहीं देते जो सिर्फ धर्म जाति की राजनीति तक सीमित रह गए, फ़र्क तो उस इंसान या परिवार को पड़ रहा है जो दैनिक मज़दूरी करके अपना घर चलाते है अपना परिवार पाल रहे है।  और इसी बात से जोड़कर आज के मुद्दे पर कहना चाहूंगा मेरे वो दोस्त जो इन हालातो से गुजर रहे है जिन्हे उनके माता - पिता ने कहीं मजदूरी करके तो कहीं कर्ज करके  पढ़ाया ताकि कल को उनका बच्चा पढ़कर लिखकर अच्छी नौकरी करेगा अच्छी इज्जत कमाएगा घर की दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी, और वो बच्चा इन हालातो में पढ़ भी रहा, लेकिन  सवाल कब तक? अर्जुन को...

आत्मविश्वास और धैर्य

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कंई दोस्त इस परिस्थिति से गुजर रहे होंगे,जो शायद पैसे कर्ज करके या जैसे तेसे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे इस उम्मीद में कि थोड़े दिन की बात है फिर शायद अच्छी नोकरी होगी हाथ में, लेकिन समय का कुछ कहते नहीं आता कब करवट बदल दे, और वर्तमान समय के लिए तो अब हम व्यापम को भी दोष नहीं दे सकते, बस यह समय धैर्य बनाए रखने का है हिम्मत और आत्मविश्वास  बनाए रखने का है,   ये समय भी निकल जाएगा, और अच्छा ना लगे यही सोचकर खुश होना जो लोग 1 नंबर या प्वाइंट से मेरिट से बाहर हुए है, जिनकी तैयारी इतनी ही चुकीं थी जिन्हें सिर्फ एग्जाम में बैठने का इंतजार था उनके दिन केसे निकलते होंगे,  और यही सोच लेना कि ये सिर्फ हमारे साथ ना होकर पूरी दुनिया में हो रहा है। कैलेंडर हमेशा तारीख को बदलता है, पर एक तारीख ऐसी भी आती है जो कैलेंडर को ही बदल देती है,  बस अपने समय का इंतजार  करे, और वो भी ना हो तो कोई दूसरा काम कर ले, पढ़ाई के अलावा भी बहुत से काम है जिससे अच्छे से जीवन यापन हो सकता है क्यूंकि आपका एक गलत फ़ैसला आपके मां बाप के हजारों सपने तोड़ सकता है। Be positive😊 ✍️गोपाल प्रजापत धार ...

प्रतिज्ञा

सूर्य सा चमक लिए, सारे जग को नयी भोर दूंगा। बादल सा खनक लिए , सारे जग को घनघोर दूंगा।। स्वयं जलता रहू कर्म की ज्वाला से , जो अंधेरो से लड़ना है। स्वयं भरता रहू अभाग्य की हाला से, जो थपेड़ों से गिरना है।। ✍🏻राजेश चोयल